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देह बेचकर भी धवल से देव्यांशी बनी ये ट्रांसजेंडर बेटी हमारी प्रेरणा है – आख़िर क्यों?

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आगामी शुक्रवार की रात10 बजे देव्यांशी साझा करने आ रही हैं संघर्ष से सफलता की अपनी दास्ताँ जो आपके दिल को हिलाकर रख देगी। अभिभावक हैं तो ज़रूर जुड़ियेगा। ये एक ट्रांसजेंडर बच्चे के संघर्ष की कहानी है जो बिल्कुल अकेले इस निर्मोही दुनिया में अपनी किस्मत को लिखता मिटाता रहा। कभी देह के बाज़ार में खुद को खुद ही बेचा दो कौर निवाले की ख़ातिर ,कभी नोचा गया शरीर तो कभी मन छला गया। कभी आत्मा तार – तार बेजार हुई …. फिर भी करता रहा कमल बनकर खिलने की तैयारी। 

  खिल उठा है अब कुमुदिनी बनकर . प्रेरणा है अब ये हम सबके लिए अंधेरों से उजाले की ओर जाने की। निराशा में आशाओं का सूरज बनकर चमकने की हिम्मत और धवल चांदनी सी निर्मल रौशनी बन बिखर जाने का सपना लिए धवल से देव्यांशी की जीवन यात्रा …..आपके मन में निश्चित ही एक ऊर्जा का संचार करेगी।

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